अयोध्याकाण्ड · दोहा 284 · दोहा/सोरठा
बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय।
बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय।
हमरें तौ अब ईस गति के मिथिलेस सहाय।।284।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.284 · पुस्तक पृ. 580, 581
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय।
उन्होंने स्नेह और सच्चे भाव से कहा, ‘शीघ्र अपने निवास-स्थान पर पधारिए।’
English explanation
With affection and sincerity she said, ‘Please return promptly to your lodging.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगि | शीघ्र | promptly |
| पाउ | पाँव; चरण | feet |
| धारिअ | रखिए; पधारिए | please set; please proceed |
| थलहि | अपने निवास-स्थान पर | to your lodging |
| कह | कहा | said |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| सतिभाय | सच्चे भाव से | with sincere feeling |
2 हमरें तौ अब ईस गति के मिथिलेस सहाय।।284।।
हमारे लिए तो अब ईश्वर ही आश्रय हैं, अथवा मिथिला के राजा सहायक हैं।
English explanation
For us now, God alone is our refuge, or the king of Mithila our helper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हमरें | हमारे लिए | for us |
| तौ | तो | indeed; as for |
| अब | अब | now |
| ईस | ईश्वर | God |
| गति | आश्रय; शरण | refuge; shelter |
| के | अथवा | or |
| मिथिलेस | मिथिला के राजा जनक | Janaka, king of Mithila |
| सहाय | सहायक | helper; support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 284
- स्रोत अभिलेख
- 2.284
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 581
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