अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।।
मूल पाठ
पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।।
राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ।।
स्रोत अभिलेख 2.209 · पुस्तक पृ. 516, 517
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह चन्द्रमा श्रीरामचन्द्रजीके सुन्दर पे्रमरूपी अमृतसे पूर्ण है। यह गुरुके अपमानरूपी दोषसे दूषित नहीं है। तुमने इस यशरूपी चन्द्रमाकी सृष्टि करके पृथ्वीपर भी अमृतको सुलभ कर दिया। अब श्रीरामजीके भक्त इस अमृतसे तृप्त हो लें॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 517 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।।
English explanation
It is filled with the nectar of pure love for Rama; no fault of disrespect toward elders taints it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरन | भरा हुआ | filled |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| सुपेम | सुंदर, निर्मल प्रेम | pure, noble love |
| पियूषा | अमृत से | with nectar |
| गुर | गुरुजनों का | toward teachers and elders |
| अवमान | अपमान | disrespect |
| दोष | दोष | fault |
| नहिं | नहीं | not |
| दूषा | दूषित करता | taints |
2 राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ।।
English explanation
Now Rama’s devotees will be satiated with this nectar; you have made nectar accessible even on earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| भगत | भक्त | devotees |
| अब | अब | now |
| अमिअँ | अमृत से | with nectar |
| अघाहूँ | तृप्त होंगे | will be satiated |
| कीन्हेहु | तुमने कर दिया | you have made |
| सुलभ | आसानी से उपलब्ध | readily accessible |
| सुधा | अमृत | nectar |
| बसुधाहूँ | धरती पर भी | even on earth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.209
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 517
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 516, 517
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