अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेंहिं भवन भूप कैकैई।।
मूल पाठ
पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेंहिं भवन भूप कैकैई।।
कहि जयजीव बैठ सिरु नाई। दैखि भूप गति गयउ सुखाई।।
स्रोत अभिलेख 2.38 · पुस्तक पृ. 375, 376
भावार्थ
मूल पाठ के बादपूछनेपर कोई जवाब नहीं देता; वे उस महलमें गये, जहाँ राजा और कैकेयी थे। 'जय-जीव कहकर सिर नवाकर (वन्दना करके) बैठे और राजाकी दशा देखकर तो वे सूख ही गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 375 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेंहिं भवन भूप कैकैई।।
English explanation
No one answered his inquiries. Sumantra went to the chamber where the king and Kaikeyi were.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछें | पूछने पर | when asked |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| ऊतरु | उत्तर | an answer |
| देई | देता था | gave |
| गए | गए | went |
| जेंहिं | जिसमें | in which |
| भवन | भवन में | to the chamber |
| भूप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कैकैई | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
2 कहि जयजीव बैठ सिरु नाई। दैखि भूप गति गयउ सुखाई।।
English explanation
Offering the greeting 'Victory and long life,' Sumantra bowed his head and sat down; seeing the king's condition, he felt withered with fright.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having said |
| जयजीव | जय हो, दीर्घायु हों | victory and long life to you |
| बैठ | बैठ गए | sat down |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | bowing |
| दैखि | देखकर | seeing |
| भूप | राजा की | the king's |
| गति | दशा | condition |
| गयउ | हो गए | became |
| सुखाई | भय से सूखे-से | withered with fright |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 375
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 375, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।