अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।।
मूल पाठ
पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।।
कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाषा। भरत सनेहँ बिचारु न राखा।।
स्रोत अभिलेख 2.258 · पुस्तक पृ. 559, 559
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर हे गोसाईं! आप जिसको जैसा कहेंगे वह सब तरहसे सेवामें लग जायगा (आज्ञापालन करेगा)। मुनि वसिष्ठजी कहने लगे—हे राम! तुमने सच कहा। पर भरतके प्रेमने विचारको नहीं रहने दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 559 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।।
English explanation
Then, master, whoever receives whatever instruction from you will fulfill it in service in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| जेहि | जिसे | whomever |
| कहँ | को | to |
| जस | जैसा | as |
| कहब | आप कहेंगे | you will instruct |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
| सो | वह | that person |
| सब | सब | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
| घटिहि | पूरा करेगा | will fulfill |
| सेवकाईं | सेवा | service |
2 कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाषा। भरत सनेहँ बिचारु न राखा।।
English explanation
The sage says, ‘Rama, you have spoken truly; but Bharata’s love has unsettled my judgment.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vashishtha |
| राम | हे राम | O Rama |
| सत्य | सत्य | truly |
| तुम्ह | तुमने | you |
| भाषा | कहा | have spoken |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| सनेहँ | स्नेह ने | love has |
| बिचारु | विवेक | judgment |
| न | नहीं | not |
| राखा | स्थिर रहने दिया | allowed to remain steady |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.258
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 559
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 559
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