अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।।
मूल पाठ
तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।।
मोरें जान भरत रुचि राखि। जो कीजिअ सो सुभ सिव साखी।।
स्रोत अभिलेख 2.258 · पुस्तक पृ. 559, 559
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसीलिये मैं बार-बार कहता हूँ, मेरी बुद्धि भरतकी भक्तिके वश हो गयी है। मेरी समझमें तो भरतकी रुचि रखकर जो कुछ किया जायगा, शिवजी साक्षी हैं, वह सब शुभ ही होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 559 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।।
English explanation
That is why I speak again and again; my mind has come under the sway of Bharata’s devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी कारण | that reason |
| तें | से | because of |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरी | फिर | again |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बस | वश में | under the sway |
| भइ | हो गई | has become |
| मति | बुद्धि | mind |
| मोरी | मेरी | my |
2 मोरें जान भरत रुचि राखि। जो कीजिअ सो सुभ सिव साखी।।
English explanation
In my judgment, whatever is done honoring Bharata’s wishes is auspicious; Shiva is witness to this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरें | मेरी | my |
| जान | समझ में | in judgment |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| रुचि | इच्छा | wishes |
| राखि | मान रखकर | honoring |
| जो | जो भी | whatever |
| कीजिअ | किया जाए | is done |
| सो | वह | that |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| साखी | साक्षी हैं | is witness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.258
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 559
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 559
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।