अयोध्याकाण्ड · दोहा 258 · दोहा/सोरठा
भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि।
भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि।
करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि।।258।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.258 · पुस्तक पृ. 559, 559
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि।
भरत की विनती आदरपूर्वक सुनिए और फिर विचार कीजिए।
English explanation
Listen respectfully to Bharata’s plea, and then consider it further.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| बिनय | विनती | plea |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सुनिअ | सुनिए | please listen |
| करिअ | कीजिए | please undertake |
| बिचारु | विचार | reflection |
| बहोरि | फिर | then again |
2 करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि।।258।।
साधुओं के मत, लोकमत, राजधर्म की नीति और वेदों का सार निकालकर उसके अनुसार कार्य कीजिए।
English explanation
Act after discerning the essence of the sages’ counsel, public opinion, royal policy, and the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करब | कार्य कीजिए | act accordingly |
| साधुमत | साधुओं का मत | the sages’ counsel |
| लोकमत | जनसमुदाय का मत | public opinion |
| नृपनय | राजधर्म की नीति | principles of royal governance |
| निगम | वेद | the Vedas |
| निचोरि | सार निकालकर | having distilled the essence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 258
- स्रोत अभिलेख
- 2.258
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 559
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।