अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।
मूल पाठ
पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।
नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.75 · पुस्तक पृ. 405, 406
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंसारमें वही युवती स्त्री पुत्रवती है जिसका पुत्र श्रीरघुनाथजीका भक्त हो। नहीं तो जो रामसे विमुख पुत्रसे अपना हित जानती है, वह तो बाँझ ही अच्छी। पशुकी भाँति उसका ब्याना (पुत्र प्रसव करना) व्यर्थ ही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 405 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।
English explanation
Only that woman whose son is devoted to Rama is truly blessed with a son in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुत्रवती | पुत्र से धन्य | truly blessed with a son |
| जुबती | स्त्री | woman |
| जग | संसार में | in the world |
| सोई | वही | that very one |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| भगतु | भक्त | devotee |
| जासु | जिसका | whose |
| सुतु | पुत्र | son |
| होई | हो | is |
2 नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी।।
English explanation
Otherwise, remaining childless is better; bearing a son who turns away from Rama is futile. Know childlessness to be preferable to such a son.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नतरु | नहीं तो | otherwise |
| बाँझ | निःसंतान स्त्री | a childless woman |
| भलि | अच्छी; बेहतर | better off |
| बादि | व्यर्थ | in vain |
| बिआनी | संतान जनी | has borne a child |
| राम | श्रीराम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख | turned away |
| सुत | पुत्र | a son |
| तें | की अपेक्षा | rather than |
| हित | हितकर | beneficial; preferable |
| जानी | जानो | know; consider |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 405
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 405, 406
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।