अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतुम्हारे ही भाग्यसे श्रीरामजी वनको जा रहे हैं। हे तात! दूसरा कोई कारण नहीं है। सम्पूर्ण पुण्योंका सबसे बड़ा फल यही है कि श्रीसीतारामजीके चरणोंमें स्वाभाविक प्रेम हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 405 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।
सकल सुकृत कर बड़ फलु एहू। राम सीय पद सहज सनेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.75 · पुस्तक पृ. 405, 406
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।
English explanation
It is because of your good fortune alone that Rama is going to the forest; dear son, there is no other cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरेहिं | तुम्हारे ही | your alone |
| भाग | सौभाग्य से | because of good fortune |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| बन | वन को | to the forest |
| जाहीं | जा रहे हैं | are going |
| दूसर | दूसरा | another |
| हेतु | कारण | cause |
| तात | बेटा | dear son |
| कछु | कोई | any |
| नाहीं | नहीं है | there is not |
2 सकल सुकृत कर बड़ फलु एहू। राम सीय पद सहज सनेहू।।
English explanation
The great reward of all virtuous deeds is this: natural love for the feet of Rama and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | समस्त | all |
| सुकृत | पुण्य कर्मों | virtuous deeds |
| कर | का | of |
| बड़ | बड़ा | great |
| फलु | फल | reward |
| एहू | यही | this very thing |
| राम | श्रीराम | Rama |
| सीय | सीता | Sita |
| पद | चरणों में | for the feet of |
| सहज | स्वाभाविक | natural; spontaneous |
| सनेहू | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 405
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 405, 406
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।