अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पावन पाथ पुन्यथल राखा। प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाषा।।
मूल पाठ
पावन पाथ पुन्यथल राखा। प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाषा।।
तात अनादि सिद्ध थल एहू। लोपेउ काल बिदित नहिं केहू।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 603, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर उस पवित्र जलको उस पुण्यस्थलमें रख दिया। तब अत्रि ऋषिने प्रेमसे आनन्दित होकर ऐसा कहा—हे तात! यह अनादि सिद्धस्थल है। कालक्रमसे यह लोप हो गया था इसलिये किसीको इसका पता नहीं था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 603 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पावन पाथ पुन्यथल राखा। प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाषा।।
English explanation
The sacred water was placed in that holy spot. Greatly gladdened with affection, Atri spoke thus.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावन | पवित्र | sacred |
| पाथ | जल | water |
| पुन्यथल | पुण्यस्थल में | in the holy spot |
| राखा | रख दिया | placed |
| प्रमुदित | अत्यंत प्रसन्न होकर | greatly gladdened |
| प्रेम | प्रेम से | with affection |
| अत्रि | अत्रि मुनि ने | sage Atri |
| अस | ऐसा | thus |
| भाषा | कहा | said |
2 तात अनादि सिद्ध थल एहू। लोपेउ काल बिदित नहिं केहू।।
English explanation
Dear son, this has been a spiritually perfected holy site from time immemorial. It had become lost through time and was known to no one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात, प्रिय पुत्र | dear son |
| अनादि | अनादिकाल से | from time immemorial |
| सिद्ध | आध्यात्मिक रूप से सिद्ध | spiritually perfected |
| थल | स्थान | site |
| एहू | यह | this |
| लोपेउ | लुप्त हो गया था | had become lost |
| काल | काल के प्रभाव से | through the passage of time |
| बिदित | ज्ञात | known |
| नहिं | नहीं | not |
| केहू | किसी को | to anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 603
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 603, 604
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।