अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। किन्ह सुजल हित कूप बिसेषा।।
मूल पाठ
तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। किन्ह सुजल हित कूप बिसेषा।।
बिधि बस भयउ बिस्व उपकारू। सुगम अगम अति धरम बिचारू।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 603, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब [भरतजीके] सेवकोंने उस जलयुक्त स्थानको देखा और उस सुन्दर [तीर्थोंके] जलके लिये एक खास कुआँ बना लिया। दैवयोगसे विश्वभरका उपकार हो गया। धर्मका विचार जो अत्यन्त अगम था, वह [इस कूपके प्रभावसे] सुगम हो गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 603 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। किन्ह सुजल हित कूप बिसेषा।।
English explanation
Then the servants found a water-bearing spot and made a special well for good water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सेवकन्ह | सेवकों ने | the servants |
| सरस | जलयुक्त | water-bearing |
| थलु | स्थान | spot |
| देखा | देखा | found |
| किन्ह | बनाया | made |
| सुजल | अच्छे जल | good water |
| हित | के लिए | for |
| कूप | कुआँ | a well |
| बिसेषा | विशेष | special |
2 बिधि बस भयउ बिस्व उपकारू। सुगम अगम अति धरम बिचारू।।
English explanation
By providence, a benefit to the world came about. Reflection on dharma is both accessible and deeply unfathomable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | दैव | providence |
| बस | के वश से | through its influence |
| भयउ | हो गया | came about |
| बिस्व | संसार का | to the world |
| उपकारू | उपकार | benefit |
| सुगम | सुगम, सरल | accessible |
| अगम | अगम्य, समझ से परे | unfathomable |
| अति | अत्यंत | deeply |
| धरम | धर्म का | on dharma |
| बिचारू | विचार | reflection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 603
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 603, 604
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