अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतकूप अब कहिहहिं लोगा। अति पावन तीरथ जल जोगा।।
मूल पाठ
भरतकूप अब कहिहहिं लोगा। अति पावन तीरथ जल जोगा।।
प्रेम सनेम निमज्जत प्रानी। होइहहिं बिमल करम मन बानी।।
स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 603, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब इसको लोग भरतकूप कहेंगे। तीर्थोंके जलके संयोगसे तो यह अत्यन्त ही पवित्र हो गया। इसमें प्रेमपूर्वक नियमसे स्नान करनेपर प्राणी मन, वचन और कर्मसे निर्मल हो जायँगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 604 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरतकूप अब कहिहहिं लोगा। अति पावन तीरथ जल जोगा।।
English explanation
People will now call this well Bharata’s Well, made exceedingly sacred by the coming together of waters from pilgrimage sites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतकूप | भरत के नाम का कुआँ, भरतकूप | Bharata’s Well |
| अब | अब | now |
| कहिहहिं | कहेंगे | will call |
| लोगा | लोग | people |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| पावन | पवित्र | sacred |
| तीरथ | तीर्थों के | from pilgrimage sites |
| जल | जल के | of waters |
| जोगा | संयोग से | through their coming together |
2 प्रेम सनेम निमज्जत प्रानी। होइहहिं बिमल करम मन बानी।।
English explanation
Those who immerse themselves in it with devotion and due observance will become pure in deed, mind, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम से | with devotion |
| सनेम | नियमपूर्वक | with due observance |
| निमज्जत | डुबकी लगाने वाले | immersing themselves |
| प्रानी | प्राणी | people |
| होइहहिं | हो जाएँगे | will become |
| बिमल | निर्मल | pure |
| करम | कर्म में | in deed |
| मन | मन में | in mind |
| बानी | वाणी में | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 604
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 603, 604
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।