अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।।
मूल पाठ
पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।।
मंगलमूरति लोचन भरि भरि। निरखहिं हरषि दंडवत करि करि।।
स्रोत अभिलेख 2.249 · पुस्तक पृ. 551, 551
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लोग पवित्र पयस्विनी नदीमें [अथवा पयस्विनी नदीके पवित्र जलमें] तीनों समय (सबेरे, दोपहर और सायंकाल) स्नान करते हैं, जिसके दर्शनसे ही पापोंके समूह नष्ट हो जाते हैं और मङ्गलमूर्ति श्रीरामचन्द्रजीको दण्डवत् प्रणाम कर-करके उन्हें नेत्र भर-भरकर देखते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 551 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।।
English explanation
They bathe in the sacred water at all three daily times; merely beholding it destroys multitudes of sins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावन | पवित्र | sacred |
| पयँ | जल में | in the water |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| काल | समय | times of day |
| नहाहीं | वे स्नान करते हैं | they bathe |
| जो | जिसे | which |
| बिलोकि | देखकर | on beholding |
| अंघ | पाप | sins |
| ओघ | समूह | multitudes |
| नसाहीं | नष्ट हो जाते हैं | are destroyed |
2 मंगलमूरति लोचन भरि भरि। निरखहिं हरषि दंडवत करि करि।।
English explanation
Rejoicing and repeatedly prostrating, they gaze their fill upon Rama, the embodiment of auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगलमूरति | मंगल के साकार रूप राम को | Rama, the embodiment of auspiciousness |
| लोचन | आँखें | eyes |
| भरि | भरकर | to their fill |
| भरि | बार-बार भरकर | again and again to their fill |
| निरखहिं | वे निहारते हैं | they gaze upon |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| दंडवत | भूमि पर पूरा शरीर झुकाकर प्रणाम | full-body prostration |
| करि | करके | performing |
| करि | बार-बार करके | performing repeatedly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.249
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 551
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 551
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।