अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।।
मूल पाठ
राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।।
सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकुला।।
स्रोत अभिलेख 2.249 · पुस्तक पृ. 551, 551
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके वचन सुनकर सारा समाज भयभीत हो गया। मानो बीच समुद्रमें जहाज डगमगा गया हो। परन्तु जब उन्होंने गुरु वसिष्ठजीकी श्रेष्ठ कल्याणमूलक वाणी सुनी, तो उस जहाजके लिये मानो हवा अनुकूल हो गयी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 551 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Hearing Rama’s words, the assembly became fearful, like a ship tossed about at sea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सभय | भयभीत | fearful |
| समाजू | सभा; उपस्थित जनसमूह | the assembled gathering |
| जनु | मानो | as though |
| जलनिधि | समुद्र | the ocean |
| महुँ | में | in |
| बिकल | व्याकुल; डगमगाता | distressed; tossed about |
| जहाजू | जहाज़ | a ship |
2 सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकुला।।
English explanation
Hearing the guru’s words, a source of great auspiciousness, it was as though a favorable wind had arisen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुर | गुरु वसिष्ठ की | of the guru, Vasishtha |
| गिरा | वाणी | speech |
| सुमंगल | परम मंगल की | of great auspiciousness |
| मूला | जड़; स्रोत | root; source |
| भयउ | हुआ | it became |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मारुत | वायु | the wind |
| अनुकुला | अनुकूल | favorable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.249
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 551
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 551
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।