अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।।
मूल पाठ
राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।।
झरना झरिहिं सुधासम बारी। त्रिबिध तापहर त्रिबिध बयारी।।
स्रोत अभिलेख 2.249 · पुस्तक पृ. 551, 551
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब श्रीरामचन्द्रजीके पर्वत (कामदगिरि) और वनको देखने जाते हैं, जहाँ सभी सुख हैं और सभी दु:खोंका अभाव है। झरने अमृतके समान जल झरते हैं और तीन प्रकारकी (शीतल, मन्द, सुगन्ध) हवा तीनों प्रकारके (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक) तापोंको हर लेती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 551 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।।
English explanation
They go to see Rama’s hill and forest, where every joy is present and no sorrow exists.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| सैल | पर्वत | hill |
| बन | वन | forest |
| देखन | देखने के लिए | to see |
| जाहीं | वे जाते हैं | they go |
| जहँ | जहाँ | where |
| सुख | सुख | joy |
| सकल | सभी | all |
| सकल | सभी प्रकार के | every kind of |
| दुख | दुःख | sorrow |
| नाहीं | नहीं हैं | are absent |
2 झरना झरिहिं सुधासम बारी। त्रिबिध तापहर त्रिबिध बयारी।।
English explanation
Water like nectar flows from the cascades, and a breeze with three qualities dispels the three kinds of affliction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| झरना | झरने | waterfalls |
| झरिहिं | झरते हैं; बहाते हैं | cascade; pour forth |
| सुधासम | अमृत के समान | like nectar |
| बारी | जल | water |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | three kinds of |
| तापहर | ताप हरने वाली | dispelling afflictions |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| बयारी | हवा | breeze |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.249
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 551
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 551
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।