अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पाप पुंज कुंजर मृगराजू। समन सकल संताप समाजू।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपापसमूहरूपी हाथीके लिये सिं ह है। सारे सन्तापोंके दलका नाश करनेवाला है। भक्तोंको आनन्द देनेवाला और भवके भार (संसारके दु:ख)-का भञ्जन करनेवाला तथा श्रीरामप्रेमरूपी चन्द्रमाका सार (अमृत) है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 617 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पाप पुंज कुंजर मृगराजू। समन सकल संताप समाजू।
जन रंजन भंजन भव भारू। राम सनेह सुधाकर सारू।।
स्रोत अभिलेख 2.326 · पुस्तक पृ. 616, 617
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पाप पुंज कुंजर मृगराजू। समन सकल संताप समाजू।
English explanation
Bharata’s conduct is a lion against the elephant-like mass of sins, and it alleviates the entire host of sorrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाप | पापों का | of sins |
| पुंज | समूह | mass |
| कुंजर | हाथी | elephant |
| मृगराजू | सिंह | lion |
| समन | शांत करने वाला | alleviating |
| सकल | समस्त | all |
| संताप | दुःख और संताप | sorrows and distress |
| समाजू | समूह | host or totality |
2 जन रंजन भंजन भव भारू। राम सनेह सुधाकर सारू।।
English explanation
This conduct delights people, removes the burden of worldly existence, and is the essence of the moon-like love for Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | लोगों को | people |
| रंजन | आनंद देने वाला | delighting |
| भंजन | मिटाने वाला | removing |
| भव | सांसारिक अस्तित्व का | of worldly existence |
| भारू | भार | burden |
| राम | श्रीराम के प्रति | for Rama |
| सनेह | प्रेम | love |
| सुधाकर | चंद्रमा | moon |
| सारू | सार | essence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 617
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 616, 617
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।