अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम पुनीत भरत आचरनू। मधुर मंजु मुद मंगल करनू।।
मूल पाठ
परम पुनीत भरत आचरनू। मधुर मंजु मुद मंगल करनू।।
हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।
स्रोत अभिलेख 2.326 · पुस्तक पृ. 616, 617
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीका परम पवित्र आचरण (चरित्र) मधुर, सुन्दर और आनन्द-मङ्गलोंका करनेवाला है। कलियुगके कठिन पापों और क्लेशोंको हरनेवाला है। महामोहरूपी रात्रिको नष्ट करनेके लिये सूर्यके समान है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 616 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 परम पुनीत भरत आचरनू। मधुर मंजु मुद मंगल करनू।।
English explanation
Bharata’s conduct is supremely pure, sweet, and beautiful; it brings joy and auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| आचरनू | आचरण | conduct |
| मधुर | मधुर | sweet |
| मंजु | सुंदर और मनोहर | beautiful and charming |
| मुद | आनंद | joy |
| मंगल | मंगल और कल्याण | auspiciousness and well-being |
| करनू | उत्पन्न करने वाला | bringing about |
2 हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।
English explanation
This conduct removes the grievous sins and afflictions of the Kali age and is a sun dispelling the night of profound delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरन | हरने वाला | removing |
| कठिन | कठिन और प्रबल | grievous and formidable |
| कलि | कलियुग के | of the Kali age |
| कलुष | पाप और मलिनता | sin and impurity |
| कलेसू | क्लेश | afflictions |
| महामोह | गहरे मोह की | of profound delusion |
| निसि | रात | night |
| दलन | नष्ट करने वाला | dispelling |
| दिनेसू | सूर्य | sun |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 616
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 616, 617
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।