अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनों ओरकी स्थिति समझकर सब लोग कहते हैं कि भरतजी सब प्रकारसे सराहने योग्य हैं। उनके व्रत और नियमोंको सुनकर साधु-संत भी सकुचा जाते हैं और उनकी स्थिति देखकर मुनिराज भी लज्जित होते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 616 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू।।
सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं। देखि दसा मुनिराज लजाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.326 · पुस्तक पृ. 616, 617
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू।।
English explanation
Considering both situations, everyone says that Bharata deserves praise in every respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दोउ | दोनों | both |
| दिसि | पक्ष या स्थितियाँ | sides or situations |
| समुझि | समझकर | having considered |
| कहत | कहते हैं | say |
| सबु | सभी | all |
| लोगू | लोग | people |
| सब | हर | every |
| बिधि | प्रकार से | in respect |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सराहन | प्रशंसा के | of praise |
| जोगू | योग्य | worthy |
2 सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं। देखि दसा मुनिराज लजाहीं।।
English explanation
Hearing of Bharata’s vows and disciplines, holy people feel humbled; seeing his condition, even eminent sages feel abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| ब्रत | व्रत | vows |
| नेम | नियम और अनुशासन | observances and disciplines |
| साधु | साधुजन | holy people |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | feel humbled |
| देखि | देखकर | on seeing |
| दसा | दशा | condition |
| मुनिराज | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| लजाहीं | लज्जित होते हैं | feel abashed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 616
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 616, 617
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।