मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
अयोध्याकाण्ड 2.326
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चौपाई
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| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पापों का | of sins | |
| समूह | mass | |
| हाथी | elephant | |
| सिंह | lion | |
| शांत करने वाला | alleviating | |
| समस्त | all | |
| दुःख और संताप | sorrows and distress | |
| समूह | host or totality |
भावार्थ
भरत का आचरण पापों के समूह रूपी हाथी के लिए सिंह है और समस्त संतापों के समूह को शांत करने वाला है।
Bharata’s conduct is a lion against the elephant-like mass of sins, and it alleviates the entire host of sorrows.
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| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोगों को | people | |
| आनंद देने वाला | delighting | |
| मिटाने वाला | removing | |
| सांसारिक अस्तित्व का | of worldly existence | |
| भार | burden | |
| श्रीराम के प्रति | for Rama | |
| प्रेम | love | |
| चंद्रमा | moon | |
| सार | essence |
भावार्थ
यह आचरण लोगों को आनंद देने वाला, संसार का भार मिटाने वाला और राम के प्रति प्रेम रूपी चंद्रमा का सार है।
This conduct delights people, removes the burden of worldly existence, and is the essence of the moon-like love for Rama.
छंद और सोरठा · पृ. 617
सिय राम प्रेम पियूष पूरन होत जनमु न भरत को।
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| प्रेम | प्रेमरूपी | in the form of love |
| पियूष | अमृत | nectar |
| पूरन | से पूर्ण | filled with |
होतटिप्पणी‘न’ के साथ शर्त का भाव। / With ‘न’, expresses a counterfactual condition. | होता | had occurred |
| जनमु | जन्म | birth |
| न | नहीं | not |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
कोटिप्पणीयहाँ संबंधसूचक; अगली पंक्तियों के ‘को’ का अर्थ ‘कौन’ है। / Possessive here; in the following lines ‘को’ means ‘who’. | का | of |
भावार्थ
एआई-प्रारूप अर्थ: यदि सीता-राम के प्रेमरूपी अमृत से पूर्ण भरत का जन्म न होता, तो आगे बताए गए कार्य कौन करता?
AI draft meaning: Had Bharata, filled with the nectar of love for Sita and Rama, not been born, who would have done the deeds described next?
मुनि मन अगम जम नियम सम दम बिषम ब्रत आचरत को॥
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन की पहुँच से | the mind’s reach |
| अगम | परे | beyond |
जमटिप्पणी‘जम’ यहाँ योग-संबंधी ‘यम’ का अवधी रूप है। / Awadhi form of yogic ‘yama’ here. | यम; नैतिक संयम | ethical restraints |
| नियम | नियम; अनुशासित आचरण | disciplined observances |
समटिप्पणी‘सम’ यहाँ ‘शम’ के अर्थ में। / ‘सम’ here means ‘shama’, mental restraint. | मन का संयम | restraint of the mind |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| बिषम | कठिन | arduous |
| ब्रत | व्रत | vows |
| आचरत | आचरण करता | would practice |
| को | कौन | who |
भावार्थ
मुनियों के मन की पहुँच से भी परे यम, नियम, मन-संयम, इंद्रिय-संयम और कठिन व्रतों का आचरण कौन करता?
Who would have practiced ethical restraints, observances, control of the mind and senses, and arduous vows beyond even the sages’ mental reach?
दुख दाह दारिद दंभ दूषन सुजस मिस अपहरत को।
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुख | दुःख | sorrow |
| दाह | संताप | anguish |
| दारिद | दरिद्रता | poverty |
| दंभ | दंभ; दिखावटी अहंकार | pretension; conceit |
| दूषन | दोष | faults |
| सुजस | उत्तम यश | noble renown |
मिसटिप्पणी‘मिस’ का मूल भाव ‘बहाने से’; यहाँ सुयश के माध्यम से। / Literally ‘under the guise of’; here, through noble renown. | के माध्यम से | through |
| अपहरत | दूर करता | would remove |
| को | कौन | who |
भावार्थ
अपने सुयश के माध्यम से दुःख, संताप, दरिद्रता, दंभ और दोषों को कौन दूर करता?
Who would have removed sorrow, anguish, poverty, pretension, and faults through his noble renown?
कलिकाल तुलसी से सठन्हि हठि राम सनमुख करत को॥
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिकाल | कलियुग में | in the age of Kali |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| से | जैसे | like |
सठन्हिटिप्पणीबहुवचन कर्मरूप; कवि का आत्मविनय। / Plural object form; the poet’s self-deprecating humility. | मूर्खों को | fools |
| हठि | आग्रहपूर्वक | insistently |
| राम | भगवान राम की ओर | toward Lord Rama |
| सनमुख | उन्मुख | turned toward |
| करत | करता | would make |
| को | कौन | who |
भावार्थ
कलियुग में तुलसी जैसे मूर्खों को आग्रहपूर्वक राम की ओर उन्मुख कौन करता?
In the age of Kali, who would have insistently turned fools like Tulsidas toward Rama?
भरत चरित करि नेमु तुलसी जो सादर सुनहिं।
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत का | of Bharata, Rama’s brother |
| चरित | चरित्र और जीवनकथा | conduct and life story |
| करि | करके; बनाकर | having made |
| नेमु | नियमित संकल्प | a regular observance |
तुलसीटिप्पणीकवि का नाम; ‘कहते हैं’ अर्थ में निहित है। / The poet’s signature; ‘says’ is implicit. | तुलसीदास कहते हैं | Tulsidas says |
| जो | जो लोग | those who |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
सुनहिंटिप्पणीबहुवचन क्रियारूप। / Plural verb form. | सुनते हैं | listen |
भावार्थ
तुलसी कहते हैं: जो भरत के चरित्र को नियम बनाकर आदरपूर्वक सुनते हैं—
Tulsidas says: Those who make it a regular observance to listen reverently to Bharata’s story—
सीय राम पद पेमु अवसि होइ भव रस बिरति॥ ३२६॥
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| पद | चरणों के प्रति | for the feet of |
| पेमु | प्रेम | love |
| अवसि | अवश्य | surely |
| होइ | उत्पन्न होता है | arises |
| भव | संसार के | of worldly existence |
| रस | रस; भोग-सुख से | from pleasures and allure |
| बिरति | विरक्ति | detachment |
भावार्थ
उनमें सीता-राम के चरणों के प्रति प्रेम और संसार के रस से विरक्ति अवश्य उत्पन्न होती है।
They surely develop love for the feet of Sita and Rama and detachment from worldly pleasures.