अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
सिय राम प्रेम पियूष पूरन होत जनमु न भरत को।
मूल पाठ
सिय राम प्रेम पियूष पूरन होत जनमु न भरत को।
मुनि मन अगम जम नियम सम दम बिषम ब्रत आचरत को॥
दुख दाह दारिद दंभ दूषन सुजस मिस अपहरत को।
कलिकाल तुलसी से सठन्हि हठि राम सनमुख करत को॥
स्रोत अभिलेख 2.326 · पुस्तक पृ. 616, 617
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीसीतारामजीके प्रेमरूपी अमृतसे परिपूर्ण भरतजीका जन्म यदि न होता तो मुनियोंके मनको भी अगम यम, नियम, शम, दम आदि कठिन व्रतोंका आचरण कौन करता? दु:ख, सन्ताप, दरिद्रता, दम्भ आदि दोषोंको अपने सुयशके बहाने कौन हरण करता? तथा कलिकालमें तुलसीदास-जैसे शठोंको हठपूर्वक कौन श्रीरामजीके सम्मुख करता?
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 617 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सिय राम प्रेम पियूष पूरन होत जनमु न भरत को।
English explanation
AI draft meaning: Had Bharata, filled with the nectar of love for Sita and Rama, not been born, who would have done the deeds described next?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| प्रेम | प्रेमरूपी | in the form of love |
| पियूष | अमृत | nectar |
| पूरन | से पूर्ण | filled with |
| होत | होता | had occurred |
| जनमु | जन्म | birth |
| न | नहीं | not |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| को | का | of |
2मुनि मन अगम जम नियम सम दम बिषम ब्रत आचरत को॥
English explanation
Who would have practiced ethical restraints, observances, control of the mind and senses, and arduous vows beyond even the sages’ mental reach?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन की पहुँच से | the mind’s reach |
| अगम | परे | beyond |
| जम | यम; नैतिक संयम | ethical restraints |
| नियम | नियम; अनुशासित आचरण | disciplined observances |
| सम | मन का संयम | restraint of the mind |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| बिषम | कठिन | arduous |
| ब्रत | व्रत | vows |
| आचरत | आचरण करता | would practice |
| को | कौन | who |
3दुख दाह दारिद दंभ दूषन सुजस मिस अपहरत को।
English explanation
Who would have removed sorrow, anguish, poverty, pretension, and faults through his noble renown?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुख | दुःख | sorrow |
| दाह | संताप | anguish |
| दारिद | दरिद्रता | poverty |
| दंभ | दंभ; दिखावटी अहंकार | pretension; conceit |
| दूषन | दोष | faults |
| सुजस | उत्तम यश | noble renown |
| मिस | के माध्यम से | through |
| अपहरत | दूर करता | would remove |
| को | कौन | who |
4कलिकाल तुलसी से सठन्हि हठि राम सनमुख करत को॥
English explanation
In the age of Kali, who would have insistently turned fools like Tulsidas toward Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिकाल | कलियुग में | in the age of Kali |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| से | जैसे | like |
| सठन्हि | मूर्खों को | fools |
| हठि | आग्रहपूर्वक | insistently |
| राम | भगवान राम की ओर | toward Lord Rama |
| सनमुख | उन्मुख | turned toward |
| करत | करता | would make |
| को | कौन | who |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 617
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 616, 617
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।