अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताने पर्यङ्कपृष्ठ (पलंगके ऊपर), गोद और हिंडोलेको छोड़कर कठोर पृथ्वीपर कभी पैर नहीं रखा। मैं सदा सञ्जीवनी जड़ीके समान [सावधानीसे] इनकी रखवाली करती रही हूँ! कभी दीपककी बत्ती हटानेको भी नहीं कहती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 393 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।।
जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ। दीप बाति नहिं टारन कहऊँ।।
स्रोत अभिलेख 2.59 · पुस्तक पृ. 392, 393
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।।
English explanation
Apart from beds, seats, laps, and swings, Sita never set foot on the hard ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पलँग | पलंग | bed |
| पीठ | पीठिका; आसन | seat; stool |
| तजि | छोड़कर; के सिवा | apart from; other than |
| गोद | गोद | lap |
| हिंड़ोरा | झूला | swing; cradle |
| सियँ | सीता ने | Sita |
| न | नहीं | not |
| दीन्ह | रखा | placed |
| पगु | पैर | foot |
| अवनि | धरती पर | on the ground |
| कठोरा | कठोर | hard |
2 जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ। दीप बाति नहिं टारन कहऊँ।।
English explanation
I keep tending her like a life-restoring herb; I do not ask her even to adjust a lamp's wick.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिअनमूरि | जीवन देने वाली जड़ी | life-restoring herb |
| जिमि | जैसे | like |
| जोगवत | सावधानी से सँभालती | carefully tending |
| रहऊँ | रहती हूँ | I continue to |
| दीप | दीपक की | of a lamp |
| बाति | बत्ती | wick |
| नहिं | नहीं | not |
| टारन | हटाने या ठीक करने को | to move or adjust |
| कहऊँ | मैं कहती हूँ | I ask |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 393
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 393
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