अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही सीता अब तुम्हारे साथ वन चलना चाहती है। हे रघुनाथ! उसे क्या आज्ञा होती है? चन्द्रमाकी किरणोंका रस (अमृत) चाहनेवाली चकोरी सूर्यकी ओर आँख किस तरह मिला सकती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 393 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा।
चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.59 · पुस्तक पृ. 392, 393
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा।
English explanation
That very Sita wishes to go with you to the forest. What will your instruction for her be, O Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very |
| सिय | सीता | Sita, Rama's wife |
| चलन | जाना | to go |
| चहति | चाहती है | wishes |
| बन | वन में | to the forest |
| साथा | तुम्हारे साथ | with you |
| आयसु | आज्ञा; निर्देश | permission; instruction |
| काह | क्या | what |
| होइ | होगी | will be |
| रघुनाथा | हे रघुवंश के नाथ राम | O Rama, lord of Raghu's line |
2 चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी।।
English explanation
How can a female chakora bird, delighting in the nectar of moonbeams, fix her eyes upon the sun?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चंद | चंद्रमा की | of the moon |
| किरन | किरणों का | of the rays |
| रस | रस; अमृतमय आनंद | nectar; sweetness |
| रसिक | रस लेने वाली; प्रेमी | delighting in; fond of |
| चकोरी | मादा चकोर पक्षी | female chakora bird |
| रबि | सूर्य की | of the sun |
| रुख | ओर | toward |
| नयन | आँखें | eyes |
| सकइ | सकती है | can |
| किमि | कैसे | how |
| जोरी | लगाना; टिकाना | fix; direct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 393
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 393
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।