अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।।
मूल पाठ
कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।।
फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा।।
स्रोत अभिलेख 2.59 · पुस्तक पृ. 392, 393
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्हें कल्पलताके समान मैंने बहुत तरहसे बड़े लाड़-चावके साथ स्नेहरूपी जलसे सींचकर पाला है। अब इस लताके फूलने-फलनेके समय विधाता वाम हो गये। कुछ जाना नहीं जाता कि इसका क्या परिणाम होगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 393 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।।
English explanation
Like a wish-fulfilling vine, I cherished her in many ways and nurtured her with the water of affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलपबेलि | मनोकामना पूरी करने वाली कल्पलता | wish-fulfilling vine |
| जिमि | जैसे | like |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| लाली | दुलारा; लाड़ किया | cherished; pampered |
| सींचि | सींचकर | having watered |
| सनेह | स्नेह का | of affection |
| सलिल | जल | water |
| प्रतिपाली | पाला-पोसा | nurtured |
2 फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा।।
English explanation
As she began to blossom and bear fruit, fate turned adverse; there is no knowing what the outcome will be.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलत | फूलते हुए | while blossoming |
| फलत | फलते हुए | while bearing fruit |
| भयउ | हो गया | became |
| बिधि | विधाता; भाग्य | the ordainer; fate |
| बामा | प्रतिकूल | adverse |
| जानि | जाना | known |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| काह | क्या | what |
| परिनामा | परिणाम | outcome |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 393
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 393
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।