अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परसत मृदुल चरन अरुनारे। सकुचति महि जिमि हृदय हमारे।।
मूल पाठ
परसत मृदुल चरन अरुनारे। सकुचति महि जिमि हृदय हमारे।।
जौं जगदीस इन्हहि बनु दीन्हा। कस न सुमनमय मारगु कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.121 · पुस्तक पृ. 444, 444
भावार्थ
मूल पाठ के बादइनके कोमल और लाल-लाल चरणों (तलवों) को छूते ही पृथ्वी वैसे ही सकुचा जाती है जैसे हमारे हृदय सकुचा रहे हैं। जगदीश्वरने यदि इन्हें वनवास ही दिया, तो सारे रास्तेको पुष्पमय क्यों नहीं बना दिया?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 444 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परसत मृदुल चरन अरुनारे। सकुचति महि जिमि हृदय हमारे।।
English explanation
At the touch of these soft, reddish feet, the earth too shrinks in apprehension, just as our hearts do.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसत | स्पर्श होते ही | upon being touched |
| मृदुल | कोमल | soft |
| चरन | चरणों से | by the feet |
| अरुनारे | लालिमायुक्त | reddish |
| सकुचति | संकोच करती है; सहमती है | shrinks in apprehension |
| महि | पृथ्वी | the earth |
| जिमि | जैसे | just as |
| हृदय | हृदय | hearts |
| हमारे | हमारे | our |
2 जौं जगदीस इन्हहि बनु दीन्हा। कस न सुमनमय मारगु कीन्हा।।
English explanation
If the Lord of the world assigned them the forest, why did he not make the road full of flowers?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| जगदीस | जगत के स्वामी ने | the Lord of the world |
| इन्हहि | इन्हें | to these travelers |
| बनु | वन | the forest |
| दीन्हा | दिया | gave; assigned |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| सुमनमय | फूलों से भरा | full of flowers |
| मारगु | मार्ग | the road |
| कीन्हा | बनाया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 444
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 444, 444
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।