अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।।
मूल पाठ
परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।।
सौंपेहु राजु राम कै आएँ। सेवा करेहु सनेह सुहाएँ।।
स्रोत अभिलेख 2.175 · पुस्तक पृ. 488, 489
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो तुम्हारे और श्रीरामचन्द्रजीके श्रेष्ठ सम्बन्धको जान लेगा, वह सभी प्रकारसे तुमसे भला मानेगा। श्रीरामचन्द्रजीके लौट आनेपर राज्य उन्हें सौंप देना और सुन्दर स्नेहसे उनकी सेवा करना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।।
English explanation
The reading ‘परम’ is uncertain here. If ‘मरम’ (inner feelings) is intended, the sense is: whoever understands your and Rama’s inner feelings will regard you favorably in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | संभवतः मर्म; मन की वास्तविक भावना या अभिप्राय। | Probably inner intent or true feelings. |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| राम | राम | Rama |
| कर | का | of |
| जानिहि | जानेगा | will understand |
| सो | वह | that person |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | way; manner |
| तुम्ह | तुम | you |
| सन | के प्रति | toward |
| भल | भला | favorably |
| मानिहि | मानेगा | will regard |
2 सौंपेहु राजु राम कै आएँ। सेवा करेहु सनेह सुहाएँ।।
English explanation
When Rama returns, hand the kingdom over to him and serve him with loving affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौंपेहु | सौंप देना | hand over |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| राम | राम | Rama |
| कै | के | of |
| आएँ | आने पर | upon returning |
| सेवा | सेवा | service |
| करेहु | करना | perform |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
| सुहाएँ | सुंदर; सुहावने | lovely; pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 488, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।