अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस बातको सुनकर श्रीरामचन्द्रजी और जानकीजी सुख पावेंगे और कोई पण्डित इसे अनुचित नहीं कहेगा। कौसल्याजी आदि तुम्हारी सब माताएँ भी प्रजाके सुखसे सुखी होंगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।।
कौसल्यादि सकल महतारीं। तेउ प्रजा सुख होहिं सुखारीं।।
स्रोत अभिलेख 2.175 · पुस्तक पृ. 488, 489
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।।
English explanation
Hearing this, Rama and Sita will be pleased; no learned person will call it improper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| सुखु | सुख | happiness |
| लहब | पाएँगे | will obtain |
| राम | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| बैदेहीं | विदेहकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| कहब | कहेगा | will call |
| न | नहीं | not |
| पंडित | विद्वान | learned person |
| केहीं | कोई भी | any |
2 कौसल्यादि सकल महतारीं। तेउ प्रजा सुख होहिं सुखारीं।।
English explanation
All the mothers, including Kausalya, will also be happy at the subjects’ happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्यादि | कौसल्या आदि | Kausalya and the other royal mothers |
| सकल | सभी | all |
| महतारीं | माताएँ | mothers |
| तेउ | वे भी | they too |
| प्रजा | प्रजा के | the subjects’ |
| सुख | सुख से | through happiness |
| होहिं | होंगी | will be |
| सुखारीं | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 488, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।