अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह वेदमें प्रसिद्ध है और [स्मृति-पुराणादि] सभी शास्त्रोंके द्वारा सम्मत है कि पिता जिसको दे वही राजतिलक पाता है। इसलिये तुम राज्य करो, ग्लानिका त्याग कर दो। मेरे वचनको हित समझकर मानो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।।
करहु राजु परिहरहु गलानी। मानहु मोर बचन हित जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.175 · पुस्तक पृ. 488, 489
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।।
English explanation
It is known in the Vedas and accepted by all that whoever receives the kingdom from his father receives the royal anointing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | विदित | known |
| संमत | स्वीकृत | accepted |
| सबही | सभी | all |
| का | के द्वारा | by |
| जेहि | जिसे | to whom |
| पितु | पिता | the father |
| देइ | देता है | gives |
| सो | वही | that person |
| पावइ | पाता है | receives |
| टीका | राजतिलक | royal anointing |
2 करहु राजु परिहरहु गलानी। मानहु मोर बचन हित जानी।।
English explanation
Rule the kingdom and set aside your distress; accept my counsel, knowing it to be for your good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहु | करो | exercise |
| राजु | राज्य-शासन | royal rule |
| परिहरहु | त्याग दो | set aside |
| गलानी | मन का संताप | distress |
| मानहु | स्वीकार करो | accept |
| मोर | मेरा | my |
| बचन | वचन | counsel |
| हित | हितकारी | beneficial |
| जानी | जानकर | knowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 488, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।