अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।।
मूल पाठ
अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।।
सुरपुर नृप पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृत सुजसु नहिं दोषू।।
स्रोत अभिलेख 2.175 · पुस्तक पृ. 488, 489
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाका वचन अवश्य सत्य करो। शोक त्याग दो और प्रजाका पालन करो। ऐसा करनेसे स्वर्गमें राजा सन्तोष पावेंगे और तुमको पुण्य और सुन्दर यश मिलेगा, दोष नहीं लगेगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।।
English explanation
AI-generated draft: Certainly fulfill the king’s word; care for the subjects and give up grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवसि | अवश्य | certainly |
| नरेस | राजा के | the king’s |
| बचन | वचन को | word |
| फुर | सत्य; पूरा | true; fulfilled |
| करहू | करो | make |
| पालहु | पालन करो | care for |
| प्रजा | प्रजा का | the subjects |
| सोकु | शोक | grief |
| परिहरहू | त्याग दो | give up |
2 सुरपुर नृप पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृत सुजसु नहिं दोषू।।
English explanation
The king will find satisfaction in heaven; you will gain merit and good renown, without incurring blame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरपुर | स्वर्ग में | in heaven |
| नृप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| पाइहि | पाएँगे | will obtain |
| परितोषू | संतोष | satisfaction |
| तुम्ह | तुम | you |
| कहुँ | को | to; for |
| सुकृत | पुण्य | merit |
| सुजसु | उत्तम यश | good renown |
| नहिं | नहीं | not |
| दोषू | दोष | blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 488, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।