अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।।
मूल पाठ
पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।।
कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।।
स्रोत अभिलेख 2.139 · पुस्तक पृ. 459, 459
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्षीरसागरको त्यागकर और अयोध्याको छोड़कर जहाँ सीताजी, लक्ष्मणजी और श्रीरामचन्द्रजी आकर रहे, उस वनकी जैसी परम शोभा है, उसको हजार मुखवाले जो लाख शेषजी हों तो वे भी नहीं कह सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 459 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।।
English explanation
Where Sita, Lakshmana, and Rama came to dwell, leaving behind the ocean of milk and Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पय | दूध | milk |
| पयोधि | समुद्र | ocean |
| तजि | छोड़कर | having left |
| अवध | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| बिहाई | त्यागकर | having forsaken |
| जहँ | जहाँ | where |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| रामु | राम | Rama |
| रहे | निवास करने लगे | dwelt |
| आई | आकर | having come |
2 कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।।
English explanation
Even a hundred thousand thousand-headed Sheshas could not describe the beauty of that forest as it truly is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कह | describe |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| सुषमा | शोभा; सुंदरता | beauty; splendor |
| जसि | जैसी है | as it is |
| कानन | वन की | of the forest |
| जौं | यदि; भले ही | if; even if |
| सत | सौ | a hundred |
| सहस | हजार | thousand |
| होंहिं | हों | were to exist |
| सहसानन | हजार मुख वाले शेषनाग | thousand-headed Shesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.139
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 459
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 459, 459
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।