अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।।
मूल पाठ
सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।।
सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।
स्रोत अभिलेख 2.139 · पुस्तक पृ. 459, 459
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसे भला, मैं किस प्रकारसे वर्णन करके कह सकता हूँ। कहीं पोखरेका [क्षुद्र] कछुआ भी मन्दराचल उठा सकता है? लक्ष्मणजी मन, वचन और कर्मसे श्रीरामचन्द्रजीकी सेवा करते हैं। उनके शील और स्नेहका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 459 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।।
English explanation
How, then, can I describe that beauty? Can turtles of a small pond bear Mount Mandara?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस शोभा को | that beauty |
| मैं | मैं | I |
| बरनि | वर्णन करके | by describing |
| कहौं | कहूँ | may I tell |
| बिधि | प्रकार | manner |
| केहीं | किस | in what |
| डाबर | छोटे तालाब के | of a small pond |
| कमठ | कछुए | turtles |
| कि | क्या | can; whether |
| मंदर | मंदर पर्वत | Mount Mandara |
| लेहीं | उठा लें; धारण करें | take up; bear |
2 सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।
English explanation
Lakshmana serves through deeds, mind, and speech; his noble conduct and love cannot be adequately described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serves |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| करम | कर्म से | through deeds |
| मन | मन से | through the mind |
| बानी | वाणी से | through speech |
| जाइ | जा सकता है | can be |
| न | नहीं | not |
| सीलु | सदाचार; सौम्य स्वभाव | noble conduct; gentleness |
| सनेहु | प्रेम | love |
| बखानी | वर्णित किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.139
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 459
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 459, 459
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।