अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरास्तेमें जाते हुए उन्हें अनेकों यात्री मिलते हैं। वे दोनों भाइयोंको देखकर उनसे प्रेमपूर्वक कहते हैं कि तुम्हारे सब अङ्गोंमें राजचिह्न देखकर हमारे हृदयमें बड़ा सोच होता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 436 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता।।
राज लखन सब अंग तुम्हारें। देखि सोचु अति हृदय हमारें।।
स्रोत अभिलेख 2.112 · पुस्तक पृ. 436, 437
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता।।
English explanation
Many travelers meet them along the way; seeing the two brothers, they speak affectionately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पथिक | यात्री | travelers |
| अनेक | बहुत से | many |
| मिलहिं | मिलते हैं | meet them |
| मग | मार्ग में | on the road |
| जाता | जाते हुए | while traveling |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | with affection |
| देखि | देखकर | seeing |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाइयों को | brothers |
2 राज लखन सब अंग तुम्हारें। देखि सोचु अति हृदय हमारें।।
English explanation
Seeing all the marks of royalty on your limbs, our hearts are deeply troubled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राजसी | royal |
| लखन | लक्षण | marks |
| सब | सभी | all |
| अंग | अंगों में | on the limbs |
| तुम्हारें | तुम्हारे | your |
| देखि | देखकर | seeing |
| सोचु | चिंता | concern |
| अति | बहुत | great |
| हृदय | हृदय में | in the heart |
| हमारें | हमारे | our |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 436
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 436, 437
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।