अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी।।
मूल पाठ
पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी।।
चले ससीय मुदित दोउ भाई। रबितनुजा कइ करत बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.112 · पुस्तक पृ. 436, 437
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सीताजी, श्रीरामजी और लक्ष्मणजीने हाथ जोड़कर यमुनाजीको पुन: प्रणाम किया और सूर्यकन्या यमुनाजीकी बड़ाई करते हुए सीताजीसहित दोनों भाई प्रसन्नतापूर्वक आगे चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 436 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी।।
English explanation
AI draft: Then Sita, Rama, and Lakshmana joined their hands and again bowed to the Yamuna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सियँ | सीता ने | Sita |
| राम | राम ने | Rama |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| जमुनहि | यमुना को | to the Yamuna River |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverent bow |
| बहोरी | फिर से | again |
2 चले ससीय मुदित दोउ भाई। रबितनुजा कइ करत बड़ाई।।
English explanation
The two brothers proceeded joyfully with Sita, praising the Yamuna, daughter of the Sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | proceeded |
| ससीय | सीता सहित | with Sita |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| रबितनुजा | सूर्य की पुत्री यमुना | Yamuna, daughter of the Sun |
| कइ | की | of |
| करत | करते हुए | offering |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 436
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 436, 437
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।