अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे।।
मूल पाठ
नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे।।
गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू। नृप सन अस बरु दूसर लेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 385, 385
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी राज्यके भूखे नहीं हैं। वे धर्मकी धुरीको धारण करनेवाले और विषय-रससे रूखे हैं (अर्थात् उनमें विषयासक्ति है ही नहीं)। [इसलिये तुम यह शंका न करो कि श्रीरामजी वन न गये तो भरतके राज्यमें विघ्न करेंगे; इतनेपर भी मन न माने तो] तुम राजासे दूसरा ऐसा (यह) वर ले लो कि श्रीराम घर छोड़कर गुरुके घर रहें॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 385 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे।।
English explanation
Rama does not crave kingship; he upholds righteousness and is indifferent to the pleasures of the senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहिन | नहीं हैं | is not |
| रामु | राम | Rama |
| राज | राज्य | kingship; the kingdom |
| के | के | for; of |
| भूखे | लालायित; भूखे | hungry; eager |
| धरम | धर्म | righteousness; duty |
| धुरीन | भार सँभालने वाले; अग्रणी | upholder; foremost bearer |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों के | of sensory objects |
| रस | रस; सुख | pleasure; enjoyment |
| रूखे | विरक्त; उदासीन | detached; indifferent |
2 गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू। नृप सन अस बरु दूसर लेहू।।
English explanation
Let Rama leave his own home and live at his teacher’s house; ask the king for this as your second boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु के | of the teacher |
| गृह | घर में | in the house |
| बसहुँ | रहें | let him dwell |
| रामु | राम | Rama |
| तजि | छोड़कर | having left |
| गेहू | अपना घर | his own home |
| नृप | राजा से | from the king, Dasharatha |
| सन | से | from |
| अस | ऐसा | such; this kind of |
| बरु | वरदान | boon |
| दूसर | दूसरा | second |
| लेहू | ले लो; माँग लो | obtain; ask for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 385
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 385, 385
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।