अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि उर छाड़हु कोहू। सोक कलंक कोठि जनि होहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहृदयमें ऐसा विचारकर क्रोध छोड़ दो, शोक और कलङ्ककी कोठी मत बनो। भरतको अवश्य युवराजपद दो, पर श्रीरामचन्द्रजीका वनमें क्या काम है!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 385 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिचारि उर छाड़हु कोहू। सोक कलंक कोठि जनि होहू।।
भरतहि अवसि देहु जुबराजू। कानन काह राम कर काजू।।
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 385, 385
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि उर छाड़हु कोहू। सोक कलंक कोठि जनि होहू।।
English explanation
Reflect on this in your heart and give up anger; do not become a storehouse of sorrow and disgrace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; in this way |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| उर | हृदय में | in the heart |
| छाड़हु | छोड़ दो | give up |
| कोहू | क्रोध | anger |
| सोक | शोक | sorrow |
| कलंक | कलंक; बदनामी | disgrace; dishonor |
| कोठि | भंडार; कोठरी | storehouse; chamber |
| जनि | मत | do not |
| होहू | बनो | become |
2 भरतहि अवसि देहु जुबराजू। कानन काह राम कर काजू।।
English explanation
By all means grant Bharata the position of crown prince; what business does Rama have in the forest?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को | to Bharata, Rama’s brother |
| अवसि | अवश्य | certainly; by all means |
| देहु | दो | give; grant |
| जुबराजू | युवराज का पद | the position of crown prince |
| कानन | वन में | in the forest |
| काह | क्या | what |
| राम | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| कर | का | of; belonging to |
| काजू | काम; प्रयोजन | business; purpose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 385
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 385, 385
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।