अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दस्वामीके साथ सुन्दर साथरी (कुश और पत्तोंकी सेज) सैकड़ों कामदेवकी सेजोंके समान सुख देनेवाली है। जिनके [कृपापूर्वक] देखनेमात्रसे जीव लोकपाल हो जाते हैं, उनको कहीं भोग- विलास मोहित कर सकते हैं!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 460 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई।।
लोकप होहिं बिलोकत जासू। तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू।।
स्रोत अभिलेख 2.14 · पुस्तक पृ. 460, 460
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई।।
English explanation
With her husband beside her, the bedding of grass and leaves is delightful, giving the comfort of a hundred beds of the god of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | पति राम के | her husband Rama |
| साथ | साथ | with |
| साँथरी | घास-पत्तों की बिछौनी | bedding of grass and leaves |
| सुहाई | सुहावनी | delightful |
| मयन | कामदेव की | of the god of love |
| सयन | शय्याएँ | beds |
| सय | सौ | a hundred |
| सम | के समान | equal to |
| सुखदाई | सुख देने वाली | comfort-giving |
2 लोकप होहिं बिलोकत जासू। तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू।।
English explanation
Can sensual pleasures captivate her, whose mere glance brings guardians of the worlds into being?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोकप | लोकों के रक्षक देवता | divine guardians of the worlds |
| होहिं | हो जाते हैं | come into being |
| बिलोकत | दृष्टि डालने से | through a glance |
| जासू | जिनके; सीता के | whose; Sita’s |
| तेहि | उन्हें; सीता को | her; Sita |
| कि | क्या | can; rhetorical question |
| मोहि | मोहित कर | captivate |
| सक | सकता है | be able to |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों का | sensual |
| बिलासू | सुख-विलास | pleasure and enjoyment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 460
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 460, 460
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।