अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।।
मूल पाठ
नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।।
रहहु भवन अस हृदयँ बिचारी। चंदबदनि दुखु कानन भारी।।
स्रोत अभिलेख 2.63 · पुस्तक पृ. 395, 396
भावार्थ
मूल पाठ के बादनवीन आमके वनमें विहार करनेवाली कोयल क्या करीलके जंगलमें शोभा पाती है ? हे चन्द्रमुखी! हृदयमें ऐसा विचारकर तुम घरहीपर रहो। वनमें बड़ा कष्ट है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 396 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।।
English explanation
Does a cuckoo accustomed to roaming a fresh mango grove look at home in a forest of karil shrubs?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नए, नवपल्लवित | fresh, newly flourishing |
| रसाल | आम के वृक्षों का | of mango trees |
| बन | वन में | in a grove |
| बिहरनसीला | विहार करने की अभ्यस्त | accustomed to roaming |
| सोह | शोभा पाती है | looks fitting |
| कि | क्या | does ... ? |
| कोकिल | कोयल | cuckoo |
| बिपिन | वन में | in a forest |
| करीला | करील की झाड़ियों के | of karil shrubs |
2 रहहु भवन अस हृदयँ बिचारी। चंदबदनि दुखु कानन भारी।।
English explanation
Consider this in your heart and remain at home; O moon-faced one, the forest brings great hardship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहहु | रहो | remain |
| भवन | घर में | at home |
| अस | ऐसा, यह बात | this |
| हृदयँ | हृदय में | in your heart |
| बिचारी | विचारकर | having considered |
| चंदबदनि | हे चंद्रमा जैसे मुख वाली सीता | O moon-faced Sita |
| दुखु | कष्ट | hardship |
| कानन | वन में | in the forest |
| भारी | बहुत बड़ा | great, severe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 396
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 395, 396
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।