अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।।
मूल पाठ
हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।।
मानस सलिल सुधाँ प्रतिपाली। जिअइ कि लवन पयोधि मराली।।
स्रोत अभिलेख 2.63 · पुस्तक पृ. 395, 396
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे हंसगमनी! तुम वनके योग्य नहीं हो। तुम्हारे वन जानेकी बात सुनकर लोग मुझे अपयश देंगे (बुरा कहेंगे)। मानसरोवरके अमृतके समान जलसे पाली हुई हंसिनी कहीं खारे समुद्रमें जी सकती है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 396 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।।
English explanation
O you with a swan-like gait, you are not suited to forest life; hearing of this, people will blame me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हंसगवनि | हे हंस जैसी चाल वाली सीता | O Sita, whose gait is like a swan’s |
| तुम्ह | तुम | you |
| नहिं | नहीं | not |
| बन | वन के लिए | for forest life |
| जोगू | योग्य, अनुकूल | suited |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| अपजसु | बदनामी, निंदा | discredit, blame |
| मोहि | मुझे | to me |
| देइहि | देंगे | will give |
| लोगू | लोग | people |
2 मानस सलिल सुधाँ प्रतिपाली। जिअइ कि लवन पयोधि मराली।।
English explanation
Can a female swan nurtured on the nectar-like waters of Lake Manasa survive in the salty ocean?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानस | मानसरोवर का | of Lake Manasa |
| सलिल | जल | water |
| सुधाँ | अमृत-जैसे | nectar-like |
| प्रतिपाली | पालित-पोषित हुई | nurtured |
| जिअइ | जी सकती है | can survive |
| कि | क्या | can ... ? |
| लवन | खारे | salty |
| पयोधि | समुद्र में | in the ocean |
| मराली | हंसिनी | female swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 396
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 395, 396
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।