अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।।
मूल पाठ
नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।।
सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।।
स्रोत अभिलेख 2.132 · पुस्तक पृ. 453, 454
भावार्थ
मूल पाठ के बादवहाँ पवित्र नदी है, जिसकी पुराणोंने प्रशंसा की है, और जिसको अत्रि ऋषिकी पत्नी अनसूयाजी अपने तपोबलसे लायी थीं। वह गङ्गाजीकी धारा है, उसका मन्दाकिनी नाम है। वह सब पापरूपी बालकोंको खा डालनेके लिये डाकिनी (डाइन) रूप है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 453 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।।
English explanation
There is a sacred river, celebrated in the Puranas, which Anasuya, Atri’s wife, brought through the power of her austerities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नदी | नदी | river |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| पुरान | पुराणों में | in the Puranas |
| बखानी | वर्णित; प्रशंसित | described; celebrated |
| अत्रिप्रिया | अत्रि की प्रिय पत्नी अनसूया ने | Anasuya, Atri’s beloved wife |
| निज | अपने | her own |
| तपबल | तप के बल से | through the power of austerities |
| आनी | लाई थीं | brought |
2 सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।।
English explanation
It is a stream of the Ganges named Mandakini, like a devouring spirit consuming all sins imagined as little children.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरसरि | गंगा की | of the Ganges |
| धार | धारा | stream |
| नाउँ | नाम | name |
| मंदाकिनि | मंदाकिनी नामक नदी | the river named Mandakini |
| जो | जो | which |
| सब | सभी | all |
| पातक | पापरूपी | sins figured as |
| पोतक | बच्चों के लिए | little children |
| डाकिनि | निगलने वाली डाकिनी | a child-devouring spirit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.132
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 453
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 453, 454
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।