अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।।
मूल पाठ
धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।।
राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू।।
स्रोत अभिलेख 2.55 · पुस्तक पृ. 389, 390
भावार्थ
मूल पाठ के बादधर्म और स्नेह दोनोंने कौसल्याजीकी बुद्धिको घेर लिया। उनकी दशा साँप-छछूँदरकी-सी हो गयी। वे सोचने लगीं कि यदि मैं अनुरोध (हठ) करके पुत्रको रख लेती हूँ तो धर्म जाता है और भाइयोंमें विरोध होता है;॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 389 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।।
English explanation
Duty and affection both besieged her mind; she was caught in a dilemma like the proverbial snake with a shrew.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म; कर्तव्य | duty |
| सनेह | स्नेह; पुत्रप्रेम | affection; love for her son |
| उभयँ | दोनों ने | both |
| मति | बुद्धि | mind; judgment |
| घेरी | घेर लिया | besieged |
| भइ | हो गई | became |
| गति | दशा | plight |
| साँप | साँप | snake |
| छुछुंदरि | छछूँदर | shrew |
| केरी | की; जैसी | of; like that of |
2 राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू।।
English explanation
If I insist on keeping my son back, duty is violated and conflict arises between the brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखउँ | मैं रोकूँ | if I keep back |
| सुतहि | पुत्र को | my son |
| करउँ | मैं करूँ | if I make |
| अनुरोधू | आग्रह | an insistent request |
| धरमु | धर्म; कर्तव्यपालन | duty; adherence to duty |
| जाइ | नष्ट हो जाए | is lost |
| अरु | और | and |
| बंधु | भाइयों में | between brothers |
| बिरोधू | विरोध | conflict |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 389
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 389, 390
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