अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दन रख ही सकती हैं, न यह कह सकती हैं कि वन चले जाओ। दोनों ही प्रकारसे हृदयमें बड़ा भारी सन्ताप हो रहा है। [मनमें सोचती हैं कि देखो—] विधाताकी चाल सदा सबके लिये टेढ़ी होती है। लिखने लगे चन्द्रमा और लिख गया राहु!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 389 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।।
लिखत सुधाकर गा लिखि राहू। बिधि गति बाम सदा सब काहू।।
स्रोत अभिलेख 2.55 · पुस्तक पृ. 389, 390
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।।
English explanation
AI draft: Kaushalya can neither keep Rama back nor tell him to go; either way, her heart burns with anguish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखि | रोककर रखना | keep back |
| न | नहीं | not |
| सकइ | सकती हैं | can |
| न | नहीं | not |
| कहि | कह | say |
| सक | सकती हैं | can |
| जाहू | जाओ | go |
| दुहूँ | दोनों | both |
| भाँति | तरह से | ways |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दाहू | जलन; संताप | burning anguish |
2 लिखत सुधाकर गा लिखि राहू। बिधि गति बाम सदा सब काहू।।
English explanation
While writing the moon, the Creator ended up writing Rahu instead; the course of fate is ever adverse to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लिखत | लिखते हुए | while writing |
| सुधाकर | चंद्रमा | the moon |
| गा | गया; जा पड़ा | ended up |
| लिखि | लिखकर | writing |
| राहू | चंद्रमा को ग्रसने वाला राहु | Rahu, the eclipsing celestial being |
| बिधि | विधाता; भाग्यविधाता | the Creator; fate |
| गति | चाल; कार्यप्रणाली | course; workings |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| सदा | सदा | always |
| सब | सब | everyone |
| काहू | के लिए | for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 389
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 389, 390
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।