अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।।
मूल पाठ
कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।।
बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.55 · पुस्तक पृ. 389, 390
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर यदि वन जानेको कहती हूँ तो बड़ी हानि होती है। इस प्रकारके धर्म-संकटमें पड़कर रानी विशेषरूपसे सोचके वश हो गयीं। फिर बुद्धिमती कौसल्याजी स्त्री-धर्म (पातिव्रत-धर्म) को समझकर और राम तथा भरत दोनों पुत्रोंको समान जानकर—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 389 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।।
English explanation
If I tell him to go to the forest, the loss is great. The queen became helpless under this dilemma and anxiety.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहूँ | if I say |
| जान | जाने को | to go |
| बन | वन में | to the forest |
| तौ | तो | then |
| बड़ि | बड़ी | great |
| हानी | हानि | loss |
| संकट | संकट; दुविधा | predicament; dilemma |
| सोच | चिंता | anxiety |
| बिबस | विवश | helpless |
| भइ | हो गईं | became |
| रानी | रानी कौसल्या | Queen Kaushalya |
2 बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी।।
English explanation
Then wise Kaushalya reflected on her duty as a wife and regarded Rama and Bharata equally as her sons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then; again |
| समुझि | समझकर | having understood |
| तिय | स्त्री; यहाँ पत्नी का | woman; here, a wife's |
| धरमु | धर्म; कर्तव्य | duty |
| सयानी | समझदार कौसल्या | the wise Kaushalya |
| रामु | राम | Rama, her son |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama's brother |
| दोउ | दोनों | both |
| सुत | पुत्र | sons |
| सम | समान | equal |
| जानी | जानकर; मानकर | regarding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 389
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 389, 390
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।