अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरम धुरीन धीर नय नागर। सत्य सनेह सील सुख सागर।।
मूल पाठ
धरम धुरीन धीर नय नागर। सत्य सनेह सील सुख सागर।।
देसु काल लखि समउ समाजू। नीति प्रीति पालक रघुराजू।।
स्रोत अभिलेख 2.304 · पुस्तक पृ. 598, 599
भावार्थ
मूल पाठ के बादधर्मधुरन्धर, धीर, नीतिमें चतुर; सत्य, स्नेह, शील और सुखके समुद्र; नीति और प्रीतिके पालन करनेवाले श्रीरघुनाथजी देश, काल, अवसर और समाजको देखकर,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 598 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धरम धुरीन धीर नय नागर। सत्य सनेह सील सुख सागर।।
English explanation
He upholds righteousness, is steadfast and skilled in wise conduct, and is an ocean of truth, affection, noble character, and happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| धुरीन | भार सँभालने वाले; प्रधान समर्थक | upholder; foremost bearer |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| नय | नीति में | in wise conduct |
| नागर | निपुण | accomplished, skilled |
| सत्य | सत्य | truth |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सील | शील; सदाचरण | noble character |
| सुख | सुख | happiness |
| सागर | सागर; अथाह भंडार | ocean; boundless repository |
2 देसु काल लखि समउ समाजू। नीति प्रीति पालक रघुराजू।।
English explanation
Rama, king of the Raghu line and upholder of right conduct and love, taking account of the place, time, occasion, and assembly—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देसु | स्थान | place |
| काल | काल; समय | time |
| लखि | देखकर; ध्यान में रखकर | considering |
| समउ | अवसर; परिस्थिति | occasion; circumstances |
| समाजू | सभा; उपस्थित जन | assembly; those present |
| नीति | नीति; उचित आचरण | right conduct |
| प्रीति | प्रेम | love |
| पालक | पालन करने वाले | upholder |
| रघुराजू | रघुवंश के राजा राम | Rama, king of the Raghu line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 598
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 598, 599
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।