अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोले बचन बानि सरबसु से। हित परिनाम सुनत ससि रसु से।।
मूल पाठ
बोले बचन बानि सरबसु से। हित परिनाम सुनत ससि रसु से।।
तात भरत तुम्ह धरम धुरीना। लोक बेद बिद प्रेम प्रबीना।।
स्रोत अभिलेख 2.304 · पुस्तक पृ. 598, 599
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[तदनुसार] ऐसे वचन बोले जो मानो वाणीके सर्वस्व ही थे, परिणाममें हितकारी थे और सुननेमें चन्द्रमाके रस (अमृत)-सरीखे थे। [उन्होंने कहा—] हे तात भरत! तुम धर्मकी धुरीको धारण करनेवाले हो, लोक और वेद दोनोंके जाननेवाले और प्रेममें प्रवीण हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 599 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बोले बचन बानि सरबसु से। हित परिनाम सुनत ससि रसु से।।
English explanation
He spoke words that seemed the very treasure of speech, beneficial in their outcome and like lunar nectar to hear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| बचन | वचन | words |
| बानि | वाणी का | of speech |
| सरबसु | सर्वस्व; समस्त सार | entire treasure; very essence |
| से | जैसे | like |
| हित | हितकारी | beneficial |
| परिनाम | परिणाम में | in outcome |
| सुनत | सुनने पर | on hearing |
| ससि | चंद्रमा का | of the moon |
| रसु | अमृतरस | nectar |
| से | जैसे | like |
2 तात भरत तुम्ह धरम धुरीना। लोक बेद बिद प्रेम प्रबीना।।
English explanation
Dear Bharata, you uphold righteousness, know worldly customs and the Vedas, and are accomplished in love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| भरत | भरत; राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| तुम्ह | तुम | you |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| धुरीना | भार सँभालने वाले | upholder |
| लोक | लोकाचार | worldly customs |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बिद | ज्ञाता | knower |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| प्रबीना | प्रवीण | accomplished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 599
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 598, 599
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।