अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी।।
मूल पाठ
धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी।।
पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू।।
स्रोत अभिलेख 2.53 · पुस्तक पृ. 387, 388
भावार्थ
मूल पाठ के बादधर्मधुरीण श्रीरामचन्द्रजीने धर्मकी गतिको जानकर मातासे अत्यन्त कोमल वाणीसे कहा—हे माता! पिताजीने मुझको वनका राज्य दिया है, जहाँ सब प्रकारसे मेरा बड़ा काम बननेवाला है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 388 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी।।
English explanation
Rama, the upholder of righteousness, understanding the course of duty, spoke to his mother in very gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| धुरीन | भार सँभालने वाले; प्रधान धारक | upholder; chief bearer |
| धरम | धर्म की | of duty; of righteousness |
| गति | रीति; मार्ग | course; way |
| जानी | जानकर | having understood |
| कहेउ | कहा | said |
| मातु | माता | his mother |
| सन | से | to |
| अति | अत्यंत | very |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in words; in speech |
2 पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू।।
English explanation
Father has given me the kingdom of the forest, where my great purpose will be served in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिताँ | पिता ने | father, as the giver |
| दीन्ह | दिया है | has given |
| मोहि | मुझे | to me |
| कानन | वन का | of the forest |
| राजू | राज्य | kingdom; dominion |
| जहँ | जहाँ | where |
| सब | सब | every |
| भाँति | प्रकार से | in ways; in respects |
| मोर | मेरा | my |
| बड़ | बड़ा; महत्त्वपूर्ण | great; important |
| काजू | कार्य; प्रयोजन | task; purpose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 388
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 387, 388
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।