अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु बचन सुनि अति अनुकूला। जनु सनेह सुरतरु के फूला।।
मूल पाठ
मातु बचन सुनि अति अनुकूला। जनु सनेह सुरतरु के फूला।।
सुख मकरंद भरे श्रियमूला। निरखि राम मनु भवरुँ न भूला।।
स्रोत अभिलेख 2.53 · पुस्तक पृ. 387, 388
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाताके अत्यन्त अनुकूल वचन सुनकर—जो मानो स्नेहरूपी कल्पवृक्षके फूल थे, जो सुखरूपी मकरन्द (पुष्परस) से भरे थे और श्री (राजलक्ष्मी) के मूल थे—ऐसे वचनरूपी फूलोंको देखकर श्रीरामचन्द्रजीका मनरूपी भौंरा उनपर नहीं भूला॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 388 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मातु बचन सुनि अति अनुकूला। जनु सनेह सुरतरु के फूला।।
English explanation
Hearing his mother’s deeply affectionate words—as though they were flowers of the wish-fulfilling tree of love—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता के | his mother’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अति | अत्यंत | very; deeply |
| अनुकूला | हितकारी; स्नेहपूर्ण | kindly; affectionate |
| जनु | मानो | as though |
| सनेह | स्नेह रूपी | of love |
| सुरतरु | कल्पवृक्ष | the heavenly wish-fulfilling tree |
| के | के | of |
| फूला | फूल | flowers |
2 सुख मकरंद भरे श्रियमूला। निरखि राम मनु भवरुँ न भूला।।
English explanation
Those words were filled with the nectar of happiness and were a source of prosperity; yet, beholding them, the bee of Rama’s mind was not drawn astray.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख रूपी | of happiness |
| मकरंद | पुष्परस; मधुर रस | nectar |
| भरे | भरे हुए | filled |
| श्रियमूला | श्री या समृद्धि के मूल | a source of prosperity and well-being |
| निरखि | देखकर | having beheld |
| राम | राम; कौसल्या के पुत्र | Rama, Kaushalya’s son |
| मनु | मन | mind |
| भवरुँ | भौंरा | bee |
| न | नहीं | not |
| भूला | मोहित होकर भटका | became beguiled or led astray |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 388
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 387, 388
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।