अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीका शरीर दिनोंदिन दुबला होता जाता है। तेज (अन्न, घृत आदिसे उत्पन्न होनेवाला मेद*) घट रहा है। बल और मुखछबि (मुखकी कान्ति अथवा शोभा) वैसी ही बनी हुई है। रामप्रेमका प्रण नित्य नया और पुष्ट होता है, धर्मका दल बढ़ता है और मन उदास नहीं है (अर्थात् प्रसन्न है)॥ १॥ * संस्कृत-कोषमें 'तेज का अर्थ मेद मिलता है और यह अर्थ लेनेसे 'घटइ के अर्थमें भी किसी प्रकारकी खींच-तान नहीं करनी पड़ती।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 615 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।।
नित नव राम प्रेम पनु पीना। बढ़त धरम दलु मनु न मलीना।।
स्रोत अभिलेख 2.325 · पुस्तक पृ. 615, 616
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।।
English explanation
AI draft: Bharata’s body grows thinner day by day; his radiance, strength, and former facial beauty diminish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देह | शरीर | body |
| दिनहुँ | प्रतिदिन | each day |
| दिन | दिन | day |
| दूबरि | दुबली | thin |
| होई | होती है | becomes |
| घटइ | घटता है | diminishes |
| तेजु | तेज | radiance |
| बलु | शक्ति | strength |
| मुखछबि | मुख की शोभा | facial beauty |
| सोई | वही | that same |
2 नित नव राम प्रेम पनु पीना। बढ़त धरम दलु मनु न मलीना।।
English explanation
His resolve of love for Rama grows ever fresh and strong; the strength of righteousness increases, and his mind remains untainted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | नित्य | daily |
| नव | नया | fresh |
| राम | श्रीराम के प्रति | for Rama |
| प्रेम | प्रेम | love |
| पनु | प्रण; संकल्प | vow; resolve |
| पीना | पुष्ट; प्रबल | strong; flourishing |
| बढ़त | बढ़ता है | increases |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| दलु | बल; सेना | strength; host |
| मनु | मन | mind |
| न | नहीं | not |
| मलीना | मलिन | tainted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.325
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 615
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 615, 616
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।