अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।।
मूल पाठ
जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।।
सम दम संजम नियम उपासा। नखत भरत हिय बिमल अकासा।।
स्रोत अभिलेख 2.325 · पुस्तक पृ. 615, 616
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसे शरद्-ऋतुके प्रकाश [विकास] से जल घटता है, किन्तु बेंत शोभा पाते हैं और कमल विकसित होते हैं। शम, दम, संयम, नियम और उपवास आदि भरतजीके हृदयरूपी निर्मल आकाशके नक्षत्र (तारागण) हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 615 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।।
English explanation
As autumn appears, water recedes, reeds flourish, and lotuses bloom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | as |
| जलु | जल | water |
| निघटत | घटता हुआ | receding |
| सरद | शरद ऋतु | autumn |
| प्रकासे | प्रकट होने पर | upon appearing |
| बिलसत | शोभित होते हैं | flourish beautifully |
| बेतस | बेंत के पौधे | reeds; cane plants |
| बनज | कमल | lotuses |
| बिकासे | खिलते हैं | bloom |
2 सम दम संजम नियम उपासा। नखत भरत हिय बिमल अकासा।।
English explanation
Control of the mind and senses, restraint, religious observances, and fasting are stars in the clear sky of Bharata’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | मन का निग्रह | control of the mind |
| दम | इंद्रियों का निग्रह | control of the senses |
| संजम | संयम | self-restraint |
| नियम | नियमित धार्मिक आचरण | religious observances |
| उपासा | उपवास | fasting |
| नखत | तारे | stars |
| भरत | राम के भाई भरत का | of Bharata, Rama’s brother |
| हिय | हृदय | heart |
| बिमल | निर्मल | clear; pure |
| अकासा | आकाश | sky |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.325
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 615
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 615, 616
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।