अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई। आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब मैं कौन-सा मुँह लेकर उन्हें उत्तर दूँगा कि मैं राजकुमारोंको कुशलपूर्वक पहुँचा आया हूँ! लक्ष्मण, सीता और श्रीरामका समाचार सुनते ही महाराज तिनकेकी तरह शरीरको त्याग देंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 465 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई। आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई।।
सुनत लखन सिय राम सँदेसू। तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू।।
स्रोत अभिलेख 2.146 · पुस्तक पृ. 465, 465
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई। आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई।।
English explanation
How shall I face him and answer that I have returned after conveying the princes safely?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहउँ | मैं दूँ | shall I give |
| उतरु | उत्तर | an answer |
| कौनु | किस | what |
| मुहु | मुँह | face |
| लाई | लेकर; दिखाकर | presenting |
| आयउँ | मैं लौट आया हूँ | I have returned |
| कुसल | सकुशल | safely |
| कुअँर | राजकुमारों को | the princes |
| पहुँचाई | पहुँचाकर | having conveyed |
2 सुनत लखन सिय राम सँदेसू। तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू।।
English explanation
On hearing the message of Lakshmana, Sita, and Rama, the king will abandon his body like a blade of grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| लखन | लक्ष्मण का | of Lakshmana |
| सिय | सीता का | of Sita |
| राम | राम का | of Rama |
| सँदेसू | संदेश | message |
| तृन | तिनके | a blade of grass |
| जिमि | की तरह | like |
| तनु | शरीर | his body |
| परिहरिहि | त्याग देंगे | will abandon |
| नरेसू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.146
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 465
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 465, 465
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