अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा।जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा।।
मूल पाठ
जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा।जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा।।
पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना। जिवनु जासु रघुनाथ अधीना।।
स्रोत अभिलेख 2.146 · पुस्तक पृ. 465, 465
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो भी पूछेगा उसे यही उत्तर देना पड़ेगा! हाय! अयोध्या जाकर अब मुझे यही सुख लेना है! जब दु:खसे दीन महाराज, जिनका जीवन श्रीरघुनाथजीके [दर्शनके] ही अधीन है, मुझसे पूछेंगे,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 465 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा।जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा।।
English explanation
Whoever asks, I must give that same answer. This is the ‘pleasure’ I must now have on returning to Ayodhya!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोइ | जो भी | whoever |
| पूँछिहि | पूछेगा | will ask |
| तेहि | उसको | to that person |
| ऊतरु | उत्तर | answer |
| देबा | देना होगा | must give |
| जाइ | जाकर | having gone |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| अब | अब | now |
| यहु | यही | this very |
| सुखु | ‘सुख’ | ‘pleasure’ |
| लेबा | पाना होगा | must experience |
2 पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना। जिवनु जासु रघुनाथ अधीना।।
English explanation
When the grief-stricken king asks—he whose life depends on Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछिहि | पूछेंगे | will ask |
| जबहिं | जब ही | when |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| दुख | दुख से | by grief |
| दीना | दीन; व्याकुल | overwhelmed |
| जिवनु | जीवन | life |
| जासु | जिनका | whose |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम के | on Rama, lord of the Raghu lineage |
| अधीना | अधीन; निर्भर | dependent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.146
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 465
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 465, 465
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।