अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे गोसाईं! सब देव और पितर तुम्हारी वैसे ही रक्षा करें, जैसे पलकें आँखोंकी रक्षा करती हैं। तुम्हारे वनवासकी अवधि (चौदह वर्ष) जल है, प्रियजन और कुटुम्बी मछली हैं। तुम दयाकी खान और धर्मकी धुरीको धारण करनेवाले हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 391 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।।
अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना। तुम्ह करुनाकर धरम धुरीना।।
स्रोत अभिलेख 2.57 · पुस्तक पृ. 391, 391
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।।
English explanation
My lord, you alone are all my gods and ancestors. Protect me as the eyelid protects the eye.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवता | gods |
| पितर | पितर; पूर्वज | departed ancestors |
| सब | सभी | all |
| तुन्हहि | आप ही | you alone |
| गोसाई | हे स्वामी | O lord |
| राखहुँ | रक्षा कीजिए | please protect |
| पलक | पलक | eyelid |
| नयन | आँख | eye |
| की | के | of |
| नाई | समान; जैसे | in the manner of; as |
2 अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना। तुम्ह करुनाकर धरम धुरीना।।
English explanation
The appointed term of exile is like water, and your dear family are like fish. You are a storehouse of compassion and an upholder of duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधि | वनवास की निर्धारित अवधि | the appointed term of exile |
| अंबु | जल | water |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परिजन | परिवार के लोग | family members |
| मीना | मछलियाँ | fish |
| तुम्ह | आप | you |
| करुनाकर | करुणा के भंडार | a storehouse of compassion |
| धरम | धर्म; कर्तव्य | righteous duty |
| धुरीना | धुरा सँभालने वाले | one who bears the chief responsibility |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 391
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 391, 391
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।