अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा विचारकर वही उपाय करना जिसमें सबके जीते-जी तुम आ मिलो। मैं बलिहारी जाती हूँ, तुम सेवकों, परिवारवालों और नगरभरको अनाथ करके सुखपूर्वक वनको जाओ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 391 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।।
जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ।।
स्रोत अभिलेख 2.57 · पुस्तक पृ. 391, 391
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।।
English explanation
Considering this, take such measures that, when you return, you may find everyone alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; this |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| सोइ | वही | that very |
| करहु | कीजिए | please do |
| उपाई | उपाय | measure; means |
| सबहि | सभी को | everyone |
| जिअत | जीवित | alive |
| जेहिं | जिससे | by which; so that |
| भेंटेहु | आप मिल सकें | you may meet |
| आई | आकर; लौटकर | on coming back |
2 जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ।।
English explanation
I give myself for you; go peacefully to the forest, leaving your people, family, and town without their protector.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाहु | जाइए | go |
| सुखेन | सुखपूर्वक | peacefully; at ease |
| बनहि | वन को | to the forest |
| बलि | न्योछावर | in loving self-offering |
| जाऊँ | मैं जाऊँ | may I give myself |
| करि | करके | having made |
| अनाथ | बिना रक्षक के | without a protector |
| जन | सेवक; अपने लोग | dependants; one's people |
| परिजन | परिवार के लोग | family members |
| गाऊँ | नगर; बस्ती | town; settlement |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 391
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 391, 391
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।